मीडिया की एक मज़बूत और ऊर्जावान आवाज़.. रोहित सरदाना कह गए अलविदा

  पत्रकार राजन शुक्ला की कलम से ✍️   नमस्कार.. आप देख रहे हैं आज तक.. मैं हूँ आपके साथ रोहित सरदाना.. शाम के 5 बज रहे हैं.. और वक़्त हो गया है दंगल का.. यकीन मानिये, यह निर्भीक आवाज़ जब भी मेरे कानों पर पड़ती थी.. मैं अलर्ट और एकाग्र हो जाया करता था.. […]

rohit sardana
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पत्रकार राजन शुक्ला की कलम से ✍️

नमस्कार.. आप देख रहे हैं आज तक.. मैं हूँ आपके साथ रोहित सरदाना.. शाम के 5 बज रहे हैं.. और वक़्त हो गया है दंगल का.. यकीन मानिये, यह निर्भीक आवाज़ जब भी मेरे कानों पर पड़ती थी.. मैं अलर्ट और एकाग्र हो जाया करता था.. क्यूंकि मेरे लिए रोहित, देश के उन चुने हुए टीवी पत्रकारों की फेहरिस्त में शुमार थे.. जिन्हें मैं, अपना आदर्श मानते हुए अक्सर उन्हें देखना और सुनना पसंद करता था……आज मैं स्तब्ध हूँ.. व्यथित हूँ.. हैरान हूँ.. रोहित सरदाना का अचानक यूँ रुख़सत कर जाना.. पत्रकारिता जगत में एक बड़ी क्षति है.. मीडिया की एक मज़बूत और ऊर्जावान आवाज़.. रोहित के तीखे तेवर और उनकी बेबाकी का मैं कायल था.. रोहित को ख़बरों की बहुत गहरी समझ थी.. रोहित के तीखे और स्पष्ट सवाल जिनकी वजह से वे अक्सर सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की बोलती बंद कर दिया करते थे.. आज हम सभी को अलविदा कह गए.. ईश्वर आपने यह ठीक नहीं किया.. रोहित की 2 नन्ही बेटियां हैं..

रोहित सिर्फ 41 साल के ही तो थे.. भला यह भी कोई उम्र है जाने की..?? निःशब्द हूँ मैं.. रोहित की पत्नी और उनकी 2 बेटियों के लिए.. ईश्वर उन्हें यह दुःख सहने का साहस दे.. मेरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ मैं दिवंगत रोहित को.. मैं उस मीडिया फ्रेटर्निटी से आता हूँ जिसे हम लोकतंत्र का चौथा पिलर कहते हैं.. इसलिए मेरा दुःख इस ख़बर पर शायद ज़्यादा है.. लेकिन यकीन मानिये मित्रों.. मेरी पीड़ा, मेरी संवेदना हर उस कोरोना संक्रमित की मौत पर भी है जितनी रोहित की मौत पर है.. मैं जानता हूँ बदलते वक़्त के साथ पत्रकारिता में भी अब कई प्रयोग होने लगे हैं..

इस बदलते मीडिया के दौर से हम में से कई लोग वाकिफ़ हैं.. लेकिन दुःख तब और भी होता है.. जब रोहित सरदाना के निधन के पश्चात देश में कुछ पापियों की कौम, अपनी ख़ुशी व्यक्त कर रही है.. शर्म आती है ऐसे जाहिलों पर, जो रोहित की मौत पर बेहूदा टिप्पणियां कर रहे हैं.. ईश्वर से भी नहीं डरते यह नासूर राक्षस.. अरे शर्म करो जाहिलों.. अपने ख़ुदा से तो डरो..एक पत्रकार होने के कारण, मेरा सौभाग्य है की मैं तमाम वो ख़बरें/तस्वीरें/सच्चाई और जानकारियां रोज़ प्राप्त करता हूँ.. जो आप में से अधिकांश लोग नहीं जान पाते हैं.. बात चाहे हुक्मरानों की हो.. सिस्टम की हो.. या देशहित/देशविरोध से वास्ता रखने वाली ख़बरें हो.. जितना संभव हो पाता है मदद कर पाता हूँ.. जिनकी नहीं कर पाता उनके लिए आज भी बेबस हूँ.. लेकिन हमें अपनी हिम्मत हारना नहीं है दोस्तों.. यह वक़्त बहुत नाज़ुक है.. इसलिए हमें साथ मिलकर लड़ना होगा.. जिन परिवारों के सदस्य क्वारंटीन हैं, आईसोलेट हैं.. उनका हमें आत्मविश्वास बढ़ाना होगा.. उन्हें हमें सकारात्मक रखना होगा.. मैं पुनः अपील करता हूँ सभी से.. जिन्होंने अपनों को खोया है उनका दर्द महसूस करना हमारे लिए संभव नहीं.. लेकिन हमें हिम्मत नहीं हारना है.. हमें डरना नहीं लड़ना है.. हमें हताश और मायूस नहीं.. अपना ख्याल स्वयं रखना है.. नमस्कार !

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