तो क्या मऊगंज बन पाएगा जिला ?

  वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही की थी घोषणा , लेकिन अब तक न हो पाया अमल,लगातार होते रहे वायदे, लेकिन सब जुबां तक ही सीमित, अब लोग कहने लगे, मऊगंज का जिला बनना है मुश्किल अनिल त्रिपाठी,रीवा MP/REWA मऊगंज जिला बन पाएगा अथवा नहीं, यह सवाल लोगों […]

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वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ही की थी घोषणा , लेकिन अब तक न हो पाया अमल,लगातार होते रहे वायदे, लेकिन सब जुबां तक ही सीमित, अब लोग कहने लगे, मऊगंज का जिला बनना है मुश्किल

अनिल त्रिपाठी,रीवा

MP/REWA मऊगंज जिला बन पाएगा अथवा नहीं, यह सवाल लोगों के दिलों में लगभग दो दशकों से लगातार बना हुआ है,आम जनता का सीधा आरोप है कि जब विधानसभा चुनाव आते हैं तब जिला का मुद्दा गरमा जाता है, उसके बाद सारे जनप्रतिनिधि इस मामले को भूल जाते हैं। लोगों का आरोप यह भी है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिला बनाने के मामले को लेकर स्थानीय जनता को ठगा है। विपक्ष भी सत्ता पक्ष पर आए दिन तंज कसता रहता है। अब जब एक बार फिर चुनावी सरगर्मियां बढ़ने की स्थिति दिखने लगी है तब यह मुद्दा फिर से गरमाने की संभावना बढ़ उठी है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या शिवराज सिंह चौहान अपने इस चौथे कार्यकाल के अगले 18 महीनों के भीतर इससे पूरा कर पाएंगे अथवा अपने ही वायदों से मुकर जायेंगे।

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बात वर्ष 2003 की थी जब मऊगंज को जिला बनाने की आवाज तेजी से उठी थी। उन दिनों में बसपा नेता डॉक्टर आई एम पी वर्मा लगातार तीसरी बार विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे। उन्होंने भी अपनी बात रखी थी। तब विचार शुरू हुआ था लेकिन लोगों ने यह माना था कि चूंकि विधायक बसपा का है इसलिए जिला बन पाना मुश्किल है। यह मुद्दा खासा गरमाया और सवर्ण समाज पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष लक्ष्मण तिवारी ने इस मुद्दे को काफी हवा दी, लोगों को यह लगा कि अब संघर्षशील प्राणी ही जिला बनवा सकता है। चुनाव के दौर में वर्ष 2008 के दौरान जब अखंड प्रताप सिंह भाजपा की ओर से मैदान में थे तब शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि आप अखंड को जिताओ मऊगंज जिला बनेगा, लेकिन लोगों ने लक्ष्मण तिवारी को सपोर्ट किया और लक्ष्मण तिवारी ने भी वायदा किया था कि वह जिला लेकर ही मानेंगे। राजनैतिक परिस्थितियां बदली और उमा भारती के साथ आ चुके लक्ष्मण तिवारी ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली, वह भी इस लालच में की उनके कार्यकाल में जिले की घोषणा हो जाएगी।


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लेकिन शिवराज सिंह चौहान इस मुद्दे को दरकिनार करते हुए चुप्पी साधे रहे और साइलेंट मोड में चले गए। वर्ष 2013 का चुनाव आया और इस दौरान घोषणा की कि लक्ष्मण तिवारी अब साथ हैं और वह जिला बनवा एंगे। लेकिन दुर्भाग्य से लक्ष्मण तिवारी हार गए और कांग्रेस के सुखेन्द्र सिंह बन्ना बिधायक बन गए। यह मामला फिर वही अटक गया। सुखेंद्र सिंह बन्ना जिला बनाने को लेकर पूरी ताकत लगाते रहे लेकिन सफल नही हुए।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान एक बार फिर चुनावी सभाओं का दौर शुरू हुआ और मऊगंज की जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने माना कि यह मामला काफी दिनों से लंबित पड़ा है इस बार यह घोषणा हो ही जाएगी बस प्रदीप पटेल को जिताओ। मऊगंज की जनता ने यह आकलन किया कि जब तक यहां भाजपा का विधायक नहीं होगा तब तक जिला नहीं बन पाएगा। लिहाजा सभी ने मिलकर प्रदीप पटेल को विधायक बना दिया। 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही लेकिन भाजपा इसका श्रेया न लेने पाए, इसलिए फिर से मऊगंज जिला नहीं बन पाया। परिस्थितियां बदली और शिवराज सिंह चौहान तख्तापलट करने में सफल हुए तब लोगों को एक बार फिर आशा जगी कि मऊगंज जिला बन जाएगा।


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लेकिन इस बीच शिवराज सिंह चौहान ने एक नया जिला निवाड़ी तो बना दिया लेकिन मऊगंज और मैहर का नंबर न लगने दिया। अब लोग कहने लगे हैं कि उनके साथ लगातार छलावा हो रहा है क्योंकि वर्तमान विधायक प्रदीप पटेल भी मऊगंज को जिला बनाने के मामले में सक्रिय नहीं दिखाई देते। इसके पीछे का कारण क्या है यह तो वही बता सकते हैं लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा पाने के बाद वह अन्य मामलों में इतना ज्यादा व्यस्त हो चुके हैं कि उन्हें मऊगंज जिला बनाने की अब सुध ही नहीं रही। आम जनता की समस्याओं को लेकर आए दिन धरने में बैठने के मामले में माहिर विधायक प्रदीप पटेल इस मुद्दे को अब दरकिनार सा करते दिखाई दे रहे हैं।

जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा के लोग भी थक से गए

यहां गौरतलब है कि मऊगंज को जिला बनाने के लिए एक संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया था, जिसमें भाजपा के ही नेता संतोष मिश्रा लगातार एक दशक से सक्रिय रहे, लेकिन जिला बनाओ संघर्ष मोर्चा की गतिविधियां भी फिलहाल ठंडी सी दिखाई दे रही है। इसके पीछे का कारण लोग यह मान रहे हैं कि अब जब तक वर्तमान मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सत्ता रहेगी तब तक मऊगंज जिला नहीं बन पाएगा,क्योंकि वह अपनी घोषणाओं पर ही अमल नहीं करते हैं। कहने को तो संघर्ष मोर्चा अस्तित्व में बना हुआ है लेकिन विभिन्न राजनैतिक कारणों के चलते गतिविधियां थोड़ी कम कर दी गई है। अब लोग यह कहने लगे हैं कि चुनाव के टाइम पर फिर से यह मुद्दा गरमा उठेगा।


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लोगों को होती है काफी दिक्कतें

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मऊगंज विधानसभा क्षेत्र के लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए रीवा तक आना पड़ता है। जिला मुख्यालय से मऊगंज विधानसभा के अंतिम छोर की दूरी लगभग 140 किलोमीटर के आसपास बनती है, अगर कोई व्यक्ति एक काम से रीवा आना चाह रहा है तो उसका पूरा समय आने जाने में ही चला जाता है। यानी कि उसको अपना काम कराने के लिए 1 दिन रीवा में रुकना ही पड़ेगा। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन गरीबों और किसानों को परेशानी कितनी ज्यादा होगी, जो इस विधानसभा के अंतिम छोर में रहते हैं। निश्चित तौर पर यदि मऊगंज को जिला बना दिया जाएगा, तो उन गरीबों की परेशानियां कुछ हद तक कम तो हो ही जाएगी।

मैहर का जिला बनना बन गया हंसी का पात्र

narayan tripathi
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मार्च 2020 में जब उठापटक का दौर चल रहा था और वर्तमान भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी उन दिनों के मुख्यमंत्री कमलनाथ के आगे पीछे मंडराते दिखाई दे रहे थे तब लोग उनका उपहास भी कर रहे थे। तब मीडिया में उनका कहना था कि मैं क्षेत्र के लोगों के समस्याओं के निपटारे के लिए मुख्यमंत्री के पास जाता हूं। जब कांग्रेस सरकार डगमगाने लगी तो कमलनाथ ने मैंहर को जिला बनाने की घोषणा कर दी। जब तक उसकी प्रक्रिया शुरू होती तब तक सरकार ही चली गई। या यूं कहिए कि मैहर जिला अस्तित्व में ही नहीं आ पाया। मैहर को जिला बनाने की ठान कर बैठे नारायण त्रिपाठी इन दिनों विंध्य बनाने का संकल्प लेकर घूम रहे हैं,

सरकार पर अच्छा खासा दबाव भी बना रखा है, लेकिन सूत्र कहते हैं कि इसके पीछे भी बहुत बड़ा कारण है। पिछले 2 साल की राजनीति मे काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है और भाजपा अपनी राजनीति के तहत एक बार फिर नए सिरे से गेम खेलने का प्लान कर रही है, इस गेम के आगे नारायण त्रिपाठी की स्थिति क्या बनेगी, मैहर को जिला बनाने का मामला कहां तक जाएगा, यह वक्त के गर्त में है।

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