MP News: जहरीले पानी और 15 लाख पेड़ों की कटाई पर एनजीटी का सख्त रुख, कहा ऐसा नही चलेगा
NGT ने सरकार से दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसी लापरवाही नही चलेगी. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जहरीले पानी और पर्यावरण से हो रहे खिलवाड़ पर खुद ही संज्ञान लिया है.

MP News: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान में हो रहे पर्यावरण से खिलवाड़ और पेयजल की बदहाली पर सख्त रुख अपनाते हुए तीनों राज्यों की सरकारों को नोटिस जारी कर जबाब मांगा है.
मीडिया रिपोर्ट्स पर लिया संज्ञान
एनजीटी ने खुद ही माना कि पीने वाला पानी अब पीने लायक नही है. मीडिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ कि पुरानी और जर्जर हो गई पाइप लाइनों की वजह से सीवेज का जहरीला पानी पेयजल में मिल रहा है.
इंदौर-भोपाल में खतरनाक मंजर-MP News
इंदौर में जहरीले पानी के सेवन से मरने वाले लोगों की खबर काफी खतरनाक है. भोपाल के कई इलाकों के पानी मे मिले ई-कोलाई वैक्टीरिया से कई लोगों के बीमार होने की खबर हैं वहीं इंदौर में जहरीले पानी से मरने वाले लोगों की मौत का हवाला दिया गया.
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15 लाख पेड़ो की बलि
एक तरफ पीने के पानी में जहर घुल रहा है और दूसरी तरफ विकास के नाम पर लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं. एनजीटी ने संज्ञान लिया कि मध्यप्रदेश में रेलवे, सड़कों और कोयला खदानों के लिए 15 लाख पुराने पेड़ो को काटा जा चुका है या काटने की तैयारी है. भोपाल, इंदौर, उज्जैन और विदिशा में पेड़ो की भारी कटाई से हवा (AQI) भी अब जहरीली होने लगी है.
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सरकार से जवाब तलब
NGT के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. ए. सेंथिल वेल ने इस पूरे मामले को पर्यावरण अधिनियम और जल प्रदूषण अधिनियम का उल्लंघन माना है. ट्रिब्यूनल ने यह स्पष्ट किया है कि लोगों को साफ और स्वच्छ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है. इस लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी.
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