रीवा परमाणु प्लांट पर उमंग सिंघार का बड़ा हमला, बोले- क्या सरकार कैंसर के लिए प्लांट लगा रही है?

Rewa Nuclear Plant: विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने रीवा के सराय गांव में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। सोमवार को भोपाल में अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सवाल किया “क्या सरकार कैंसर के लिए पावर प्लांट डालना चाहती है? क्या आसपास के लोगों को मारना चाहती है?” परियोजना की जगह बदलने की मांग करते हुए, सिंघार ने आरोप लगाया कि इस परियोजना के लिए गरीब आदिवासियों, दलितों और किसानों को उजाड़ने करने की तैयारी चल रही है।
150 हेक्टेयर निजी जमीन के अधिग्रहण का दावा
सिंघार के अनुसार प्रस्तावित पावर प्लांट के लिए सरकारी जमीन के अलावा लगभग 150 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से जल सत्याग्रह कर रहे हैं लेकिन उनकी चिंताओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर ने ग्रामीणों को जबरन बेदखल करने की धमकी दी है।
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ग्राम सभा के विरोध के बावजूद बोरिंग की अनुमति का आरोप
विंध्य क्षेत्र के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि रीवा के सिरमौर और मनगवां इलाकों में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र से आदिवासी और दलित समुदायों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा द्वारा परियोजना का औपचारिक विरोध किए जाने के बावजूद एक फर्जी सरपंच के पत्र के आधार पर बोरिंग की अनुमति दी जा रही है।
परमाणु परियोजना के खिलाफ अदालत जाएगी कांग्रेस
सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या घनी आबादी वाले इलाके में परमाणु संयंत्र लगाया जाना चाहिए? उन्होंने दावा किया कि सरकार उद्योगपतियों को जमीनें सौंप रही है और गरीबों की लाशों पर बड़े उद्योगपतियों को अरबपति बनाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को केवल जिला कलेक्टरों के नजरिए से देख रही है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने की योजना बना रही है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजे पर भी सवाल
पन्ना जिले में केन बेतवा लिंक परियोजना के बारे में बात करते हुए उमंग सिंघार ने बताया कि उन्होंने प्रभावित निवासियों और जिला कलेक्टर दोनों से मुलाकात की है। उन्होंने गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया कि मुआवजा राशि उन लोगों को बांट दी गई है जिनका इस परियोजना से कोई लेना-देना नहीं है और जिन्हें इसके कारण कोई नुकसान भी नहीं हुआ है। सरकार ने केन-बेतवा परियोजना के तहत वास्तव में विस्थापित होने वाले लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं की है। इसके अलावा प्रभावित लोगों के लिए कोई संयुक्त बैंक खाता भी नहीं खोला गया है।





