MP Milk License Rule: एमपी में मिलावटखोरी पर लगेगी लगाम, दूध बेचने वालों के लिए लाइसेंस जरूरी
मध्य प्रदेश में दूध में मिलावट रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब दूध उत्पादन और बिक्री करने वालों के लिए लाइसेंस (MP Milk License Rule) लेना अनिवार्य कर दिया गया है. इस कदम से मिलावटी दूध पर नियंत्रण करने और पूरे सिस्टम की निगरानी मजबूत करने में मदद मिलेगी.

MP Milk License Rule: मध्य प्रदेश में दूध उत्पादकों और दूध बेचने वालों की मिलावट खोरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है. इसके अलावा दूध संग्रह, परिवहन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और भंडारण व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए हैं.
सरकार का मानना है कि इस फैसले के बाद मिलावटी दूध में रोक लगाने में काफी मदद मिलेगी. इसके अलावा प्रदेश में ऐसे दूध उत्पादकों और बेचने वालों की पहचान की जाएगी,जो अभी तक पंजीकृत नही हैं, साथ ही दूध से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
केंद्र ने मांगी रिपोर्ट
दूध के उत्पादन और उसकी बिक्री को लेकर केंद्र सरकार सख्ती बरत रही है. इसी के तहत भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें पंजीकरण या लाइसेंस (MP Milk License Rule) लेना जरूरी बताया गया है.
FSSAI के निर्देशों के अनुसार डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को छोड़कर बाकी सभी दूध उत्पादकों और दूध बेचने वालों को खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में बेचा जाने वाला दूध तय मानकों के अनुरूप और सुरक्षित हो.





