मध्य प्रदेश बना चीता स्टेट! तीन इलाकों में चीतों की मौजूदगी, आबादी 60 तक पहुंचने का दावा

MP News: मध्य प्रदेश अब सिर्फ़ टाइगर स्टेट ही नहीं, बल्कि चीता स्टेट भी बन गया है। राज्य में चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत कूनो नेशनल पार्क से हुई थी। अभी ये जानवर मध्य प्रदेश की तीन अलग-अलग जगहों पर घूम रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 साल की समर्पित जन-सेवा का जश्न मनाते हुए, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि चीते अब राज्य के अलग-अलग हिस्सों में आज़ादी से घूम रहे हैं।
कूनो से गांधी सागर तक चीतों का विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के कार्यकाल की उपलब्धि का ज़िक्र करते हुए, मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण के महत्व पर ज़ोर दिया। चीते अब कूनो नेशनल पार्क, गांधी सागर और रानी दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में आज़ादी से घूमते हुए देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब यह सवाल उठता है कि चीते सबसे अच्छी तरह कहाँ पनपते हैं, तो मध्य प्रदेश का नाम ही दिमाग में आता है। यह साफ़ है कि राज्य पूरे एशिया में चीतों के लिए असली घर बन गया है।
शुरुआती चुनौतियों के बाद बढ़ी उम्मीद
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन शुरुआती दिनों को याद किया जब कुछ चीतों की मौत ने उनके जीवित रहने को लेकर चिंताएँ पैदा कर दी थीं। उन्होंने कहा कि चीते अब परिवार के सदस्यों या बच्चों की तरह हैं जो राज्य के लिए बहुत सौभाग्य की बात है। उनकी मौजूदगी रोज़ाना खुशी लाती है और हालात में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव दिखाती है। चीतों की आबादी बढ़ी है, और विविध संसाधनों से समृद्ध मध्य प्रदेश अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार तरक्की कर रहा है।
60 तक पहुंची चीतों की आबादी का दावा
उन्होंने बताया कि उन्होंने इन जानवरों की सुरक्षा के लिए भगवान महाकाल से प्रार्थना की थी। तब से, चीतों की आबादी लगातार बढ़ी है। गौर करने वाली बात है कि मध्य प्रदेश में चीतों की आबादी अब 60 तक पहुँच गई है, जिनमें से 38 का जन्म भारत में हुआ है। अभी, कूनो नेशनल पार्क में सबसे ज़्यादा चीते हैं, उसके बाद गांधी सागर अभयारण्य का नंबर आता है। इसके अलावा, वीरांगना दुर्गावती अभयारण्य में भी चीतों को छोड़ा गया है। यह वन्यजीव संरक्षण में मध्य प्रदेश की लगातार प्रगति का साफ़ सबूत है।
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