MP Guest Teacher News: एमपी के 70 हज़ार से अधिक अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर खतरा, लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश से खलबली
MP Guest Teacher E Attendance Rule: मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालक न्यायालय ने अतिथि शिक्षकों पर सख्ती बढ़ा दी है 7 दिनों तक अनुपस्थित रहने पर जाएगी नौकरी

MP Guest Teacher News: मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के लिए एक बड़ी खबर है, लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा एमपी के 70 हज़ार से अधिक अतिथि शिक्षकों (Guest Teacher) के लिए सख्त निर्देश जारी करते हुए यह कहा है कि अगर कोई भी अतिथि शिक्षक लगातार 7 दिनों तक निर्धारित नियमों के साथ ई-अटेंडेंस नहीं दर्ज करता है तो फिर उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी.
मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय के द्वारा पहले भी ई-अटेंडेंस को लेकर सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन यह नियम अतिथि शिक्षकों पर अत्यधिक कठोरता के साथ लागू किए गए हैं, यह व्यवस्था स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूरे मध्य प्रदेश में लागू की गई है.
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ई-अटेंडेंस से जुड़ा नियम क्या है.?
मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने एवं शिक्षकों की मनमानी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से ई-अटेंडेंस का नियम लागू किया है, प्रदेश के जिन शासकीय विद्यालय में स्थाई शिक्षकों की कमी है वहां अतिथि शिक्षकों (Guest Teacher) की नियुक्ति की गई है, ताकि पठन-पाठन बेहतर ढंग से हो सके.
इन शिक्षकों की उपस्थिति पर नजर रखने के लिए ई-अटेंडेंस प्रणाली (MP Guest Teacher E Attendance) को लागू किया गया है, जिस पर दैनिक उपस्थिति दर्ज करनी होती है और इसी के आधार पर वेतन भी जारी किया जाता है, विभाग के द्वारा यह बताया गया की सख्त नियम होने के बावजूद भी कई अतिथि शिक्षक तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या जैसी समस्याएं बताकर अनुपस्थित रहते हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए यह नियम लागू किया गया है.
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अतिथि शिक्षक संगठनों ने किया विरोध
मध्य प्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी किए गए आदेश का अतिथि शिक्षक संगठनों ने जमकर विरोध किया है, उन्होंने इसे तुगलकी फरमान बताया है, अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश सचिव रमाकांत गुप्ता के द्वारा यह कहा गया है कि जो शिक्षक जानबूझकर अनुपस्थित रहते हैं उनके ऊपर कार्रवाई उचित है.
लेकिन तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या, बीमारी दुर्घटना या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में अनुपस्थित रहने वालों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं बनाए गए, उन्होंने कहा है कि आदेश पर “कारण बताओ नोटिस” का प्रावधान जोड़ा जाए ताकि वास्तविक कारणों पर विचार हो सके और अगर नियमों में संशोधन नहीं होता तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन होगा.





