Indore News: 30 हजार का बल्ब और 33 हजार का फिनाइल! पोस्टर देखते ही भड़के कैलाश विजयवर्गीय

Indore News: इंदौर शहर में बीजेपी की लोकतंत्र बचाओ अराजकता मिटाओ रैली पूरे जोरो शोरो से चल रही थी। मंच पर एक नेता लोकतंत्र के बारे में भाषण दे ही रहे थे कि तभी भीड़ के बीच से एक अनचाहा मेहमान सामने आ गया। सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडे सीधे मंच के सामने आ पहुंचे। उनके हाथ में एक पोस्टर था जिसमें नगर निगम के खर्चों से जुड़े कुछ हैरान करने वाले आंकड़े लिखे थे। “30 हजार का बल्ब और 33 हजार का फिनाइल!” फिनाइल का नाम सुनकर कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इतने भड़क गए कि रैली का मुख्य राजनीतिक एजेंडा ही पीछे छूट गया।
पोस्टर देखते ही रोकना पड़ा मंत्री को भाषण
मंच से जब लोकतंत्र की रक्षा और अराजकता को खत्म करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, तभी भीड़ का ध्यान प्रहलाद पांडे के पोस्टर की ओर चला गया। लाइट बल्ब और फिनाइल की बताई गई कीमतें नगर निगम के बजट का मजाक उड़ाती लग रही थीं। जैसे ही कैलाश विजयवर्गीय की नजर इस अजीबोगरीब पोस्टर पर पड़ी तब उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने अपना भाषण रोका और पुलिस को बुलाया। “ये एक न्यूसेंस यहां पर आ गया… इधर आओ, पुलिस अधिकारी कोई आ जाए! एक पुलिस अधिकारी आ जाए!”
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कैलाश विजवार्गी ने मंच से ही दी चेतावनी
मंच से ही मंत्री ने पोस्टर पकड़े हुए उस व्यक्ति को फटकार लगाई और चेतावनी दी कि जहां जवाब देना होगा, वहां दे देंगे, अभी तो पतली गली पकड़ो, वरना लोग फ्री-फंड में जवाब दे देंगे! लेकिन इतने से जब मन नहीं भरा! इतने पर भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने पुलिस को साफ निर्देश दिया “ये न्यूसेंस कर रहा है, इसका कागज लो और इसको जरा गाड़ी में बिठा दो थोड़ी देर के लिए… इसको ले जाओ जरा यहां से, इसको गाड़ी में बिठाओ! यहां दिखना नहीं चाहिए।” मंत्री के आदेश के बाद पुलिस हरकत में आ गई। पोस्टर जब्त कर लिया गया और प्रहलाद पांडे को एक सरकारी गाड़ी में बैठाकर वहाँ से ले जाया गया।
‘इतने जुटे खाने के बाद भी यहाँ आ गया’
गुस्से में आकर मंत्री ने कुछ ऐसी बातें कहीं जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई हैं। अपना गुस्सा निकालते हुए उन्होंने कहा “साला इतने जूते खाने के बाद में भी यहां पर आ गया जबरदस्ती में!” सवाल यह उठता है कि 30,000 रुपये के बल्ब और 33,000 रुपये के फिनाइल को लेकर मंत्री इतने भड़क क्यों गए? अगर हिसाब किताब में कोई गड़बड़ी थी तो वे माइक्रोफोन के सामने ही इसका जवाब दे सकते थे फिर सवाल उठाने वाले व्यक्ति को जबरदस्ती वहां से खींचकर ले जाने की क्या जरूरत थी?
मंत्री के इस आक्रामक व्यवहार के वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी
यह पूरी घटना कार्यक्रम के घोषित उद्देश्य और मंत्री के बर्ताव के बीच एक बड़ा विरोधाभास दिखाती है। जिस मंच से जोरो शोरो से लोकतंत्र बचाने की बात कही जा रही थी, वहीं एक आम नागरिक जो हाथ में पोस्टर लिए आया था उसे न्यूसेंस की उपाधि से नवाजा गया और उसे जबरदस्ती वहां से हटा दिया गया। अब यह मामला सिर्फ बल्ब या फिनाइल की बढ़ी हुई कीमतों तक सीमित नहीं रह गया है असली सवाल यह है कि क्या लोकतंत्र बचाने के लिए आयोजित रैली में सवाल पूछना अब कोई अपराध बन गया है? फिलहाल मंत्री के इस आक्रामक व्यवहार के वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।
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