Mauganj News: मऊगंज के पहाड़ी स्कूल के पूर्व बाबू महेंद्र प्रताप सिंह पर ED की कार्रवाई, 1.64 करोड़ की संपत्ति अटैच

Mauganj News: मऊगंज जिले के पहाड़ी संकुल में लंबे समय तक बाबू के पद पर पदस्थ रहे महेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी रीता सिंह के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ईडी की भोपाल इकाई ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत दोनों से जुड़ी करीब 1 करोड़ 64 लाख रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है. इनमें रीवा जिले में खरीदे गए जमीन के भूखंड और स्कूल भवन भी शामिल हैं.
ईडी के मुताबिक, महेंद्र प्रताप सिंह ने शासकीय सेवा के दौरान अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की और कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित रकम का इस्तेमाल जमीन खरीदने, स्कूल भवन बनवाने, वाहन और बीमा पॉलिसियों सहित विभिन्न संपत्तियों में किया गया.
25 साल की जांच अवधि में 1.64 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति
प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. एजेंसी के अनुसार, 13 फरवरी 1995 से 9 सितंबर 2020 के बीच महेंद्र प्रताप सिंह की आय और संपत्तियों की जांच की गई. इस दौरान करीब 1.64 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित किए जाने की बात सामने आई. ईडी ने इस संपत्ति को ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में लगभग 191.11 प्रतिशत अधिक बताया है.
जांच एजेंसी का कहना है कि संबंधित संपत्तियों की खरीद और निर्माण में लगाई गई रकम के वैध स्रोतों को लेकर पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं मिल सका. इसी आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है.
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रीवा में जमीन और स्कूल भवन पर कार्रवाई
ईडी की कार्रवाई में रीवा जिले में स्थित जमीन के भूखंड और स्कूल भवन शामिल हैं. एजेंसी को संदेह है कि इन संपत्तियों का संबंध कथित अपराध से अर्जित आय से है. हालांकि मामले में जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है.
सितंबर 2020 में EOW ने की थी छापेमारी
इस मामले की शुरुआत सितंबर 2020 में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की कार्रवाई से हुई थी. उस समय ईओडब्ल्यू ने महेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापेमारी की थी. EOW की एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, वर्ष 2003 से 2020 के बीच महेंद्र प्रताप सिंह की ज्ञात स्रोतों से कुल आय 46 लाख 80 हजार 656 रुपये आंकी गई थी. वहीं इसी अवधि में उनका कुल व्यय 2 करोड़ 80 लाख 98 हजार 125 रुपये पाया गया था.
जांच के दौरान जमीन, वाहन, बैंक खातों, शेयर, बीमा पॉलिसियों और बच्चों की शिक्षा पर किए गए खर्च की भी पड़ताल की गई थी. ईओडब्ल्यू ने अपनी प्रारंभिक जांच में ज्ञात आय से लगभग 600 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने का आरोप लगाया था. ईओडब्ल्यू और ईडी की जांच में सामने आए प्रतिशत अलग-अलग हैं. दोनों एजेंसियों ने अलग-अलग जांच अवधि और गणना के आधार पर अपने निष्कर्ष दर्ज किए हैं.
पिता की मृत्यु के बाद मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
महेंद्र प्रताप सिंह मूल रूप से मऊगंज जिले के मर्यादपुर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं. उनके पिता भैया लाल सिंह की मृत्यु के बाद वर्ष 1994-95 में शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर उनकी अनुकंपा नियुक्ति हुई थी.
नियुक्ति के बाद उन्होंने शिक्षा विभाग में सेवाएं दीं और लंबे समय तक पहाड़ी संकुल में पदस्थ रहे. पहाड़ी संकुल के अंतर्गत लगभग 150 से 200 शिक्षक आते थे. यहां शिक्षकों के भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, अवकाश स्वीकृति और वेतन वृद्धि से जुड़े कार्यालयीन कार्यों में महेंद्र प्रताप सिंह की भूमिका थी.
अब आगे की जांच में जुटी ED
ईओडब्ल्यू की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय ने संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. एजेंसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की जांच आगे बढ़ा रही है. इस मामले में महेंद्र प्रताप सिंह और उनकी पत्नी का पक्ष उपलब्ध कराई गई जानकारी में सामने नहीं आया है.





