Madhya Pradesh

Mukhyamantri Yuva Udyami Yojana में 72 लाख का घोटाला, EOW ने किया कई लोगों पर केस दर्ज

MP NEWS: Mukhyamantri Yuva Udyami Yojana के तहत दिए गए बैंक लोन में बड़ा फर्जी बाड़ा सामने आया है. जिसके बाद EOW ने बैंक के अफसरों के साथ-साथ कई लोगों पर केस दर्ज किया है.

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Mukhyamantri Yuva Udyami Yojana: मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत बैंक द्वारा दिये गए लोन में बड़ा फर्जीबाड़ा उजागर हुआ है. EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा मंडीदीप से जुड़े 72 लाख रुपए के लोन घोटाले में लाभार्थी, निजी फर्म संचालक एवं बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है.

EOW द्वारा की गई जांच में सामने आया कि लोन पुरानी 120 टन क्षमता की चैन माउंटेन क्रेन की खरीदी के नाम पर लिया गया था. लेकिन ना वैध तरीके से क्रेन खरीदी गई और न बैंक के नियमों का पालन किया गया. इस पूरे मामले में घोटाला करने का पूरा प्लान बनाकर सरकारी योजना का दुरुपयोग किया गया है.

EOW ने ऑल कार्गो लॉजिस्टिक्स लिमिटेड के संचालक, ज्ञानेंद्र सिंह असवाल, विजयपाल सिंह परिहार एवं सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक वीवी अय्यर और लोन प्रभारी बीएस रावत के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 409, 120-B और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है.

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2021 में की गई थी शिकायत

सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक रविचंद्र गोयल ने 22 अक्टूबर 2021 को EOW भोपाल में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया था कि विजयपाल सिंह परिहार ने ऋण लेते समय गलत जनकारी देकर बैंक और शासन को धोखे में रखकर लोन लिया.

कागजों में खरीदी गई क्रेन

जांच में सामने आया कि 2017 में एस. बी/एस. वी इंटरप्राइजेस के प्रोपाइटर विजय पाल द्वारा 1 करोड़ की परियोजना लागत दिखाकर 72 लाख रुपये का बैंक लोन स्वीकृति कराया गया. शेष 28 लाख रुपये की मार्जिन मनी दर्शायी गई. क्रेन खरीदी के लिए ऑल कार्गो समूह से जुड़े खाते में राशि भेजी गई. कागजों में क्रेन की कीमत 1 करोड़ रुपये बताई गई. जांच में कई चौकाने वाले खुलासे सामने आए.

जैसा कि क्रेन का पंजीकरण दूसरे कंपनी के नाम पर था लेकिन भुगतान किसी दूसरी कंपनी के खाते में किया गया. जबकि क्रेन पहले से एक्सिस बैंक में बंधक पाई गई. जांच में सामने आया कि ऋण खाते को 21 लाख रुपये का सरकारी लाभ मिला.

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NPA होने के बाद घोटाले की खुली परतें

जब लोन की किस जमा नहीं हुई तो वर्ष 2020 के अंत में खाता एनपीए घोषित कर दिया गया. जिसके बाद बैंक ने आरटीओ एवं वाहन पोर्टल से जांच कराई. जांच में सामने आया कि जिस क्रेन को बैंक के पास गिरवी होना चाहिए था, वो लियो इंजीनियरिंग सर्विस के नाम पर दर्ज थी और बाद में टाटा फाइनेंस के पास भी गिरवी की गई. EOW द्वारा जब जांच की गई तो कई परतें खुलने लगी और कई चौकाने वाले खुलासे सामने आए.

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