Madhya Pradesh

Rewa Lok Sabha constituency: रीवा में नीलम की चमक फीकी, जनार्दन से जनता ने बनाई दूरी, जानिए किसके सर बंधेगा जीत का ताज

रीवा मे बहुजन की उपजाऊ जमीन पर नीलम की चमक फीकी, जनता की जनार्दन से दूरी, जानिए किसके सिर बंधेगा ताज - Rewa Lok Sabha constituency

Rewa Lok Sabha constituency: आगामी होने जा रहे लोकसभा चुनाव की तारीख जैसे ही नजदीक आ रही है. वैसे ही राजनीतिक पारा भी चढ़ने लगा है. मध्य प्रदेश के रीवा जिले की धरती 1991 से बहुजन समाज पार्टी के लिए उपजाऊ रही है. यहां तीन बार बहुजन समाज पार्टी के सांसद निर्वाचित होते आए हैं. अब 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी से नीलम अभय मिश्रा चुनाव मैदान में है. वही भाजपा ने तीसरी बार जनार्दन पर विश्वास जताते हुऐ अपना प्रत्याशी बनाया है वही बहुजन समाज पार्टी ने भी अभिषेक पटेल को चुनावी मैदान में उतर कर मुकाबला रोचक कर दिया है.

नीलम की चमक फीकी

कांग्रेस प्रत्याशी नीलम की चमक फीकी पड़ रही है क्योंकि लोकसभा चुनाव के पूर्व सेमरिया रीवा सिरमौर छोड़कर अन्य विधानसभा क्षेत्र में उनके द्वारा बनाए गए उनके कोई भी कार्यकर्ता नहीं है. बीते विधानसभा चुनाव हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशियों के दम पर दंभ भर रही हैं. जो खुद नहीं जीत पाए वे इन्हें कैसे जीता पायेंगे शायद नीलम अभय मिश्रा से ज्यादा कोई नहीं जान पाएगा. स्थितियों को देखकर ऐसा लग रहा है कि इस बार अभय मिश्रा की साम, दाम, दंड, भेद वाली तकनीक भी काम नहीं आने वाली है.

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जनता की जनार्दन से दूरी

रीवा लोकसभा सीट से भाजपा ने तीसरी बार जनार्दन मिश्रा को टिकट देकर जनता के बीच भेज दिया लेकिन जनार्दन मिश्रा को खुद ही पता नहीं है कि उन्होंने दो पंचवर्षी क्या काम किए हैं. जनार्दन मिश्रा रीवा लोकसभा सीट से नरेंद्र मोदी का प्रचार कर रहे हैं. जनसंपर्क के बीच जनार्दन मिश्रा खुद की नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी की उपलब्धियां गिनते फिर रहे हैं उन्हें खुद नहीं मालूम कि उनके कार्यकाल में क्या काम किए गए और अब आने वाले समय में रीवा लोकसभा की जनता की ज़रूरतें क्या है.

रीवा जिले में स्थिति तो थोड़ा ठीक है लेकिन अगर बात करें नवगठित मऊगंज जिले की तो 10 वर्ष सांसद रहने के बाद भी जनार्दन मिश्रा को मऊगंज जिले के सैकड़ो गांव के लोग पहचानते तक नहीं है. सांसद जनार्दन मिश्रा का आदर्श ग्राम बहुती भी उजड़ा और वीरान पड़ा हुआ है. अब जनता के बीच एक डर बना हुआ है कि अगर मोदी के नाम पर फिर से जनार्दन मिश्रा को चुनते हैं तो क्या अगली पंचवर्षीय जनार्दन मिश्रा उनका ध्यान देंगे या फिर पूर्व की तरह ही शौचालय की सफाई करते नजर आएंगे.

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राजेंद्र शुक्ला बने जनार्दन के खेवनहार 

रीवा लोकसभा सीट से जनार्दन मिश्रा को चुनाव जीतने की जिम्मेदारी इस बार स्वयं रीवा विधायक और उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ले रखी है. खैर उन्हें सीधी का भी प्रभारी बनाया गया है पर उनका ज्यादा फोकस जनार्दन पर ही दिखाई दे रहा है. जनार्दन मिश्रा राजेंद्र शुक्ल के एश मैंन माने जाते हैं. राजेंद्र शुक्ला को भी यह बात अच्छे से मालूम है कि अगर रीवा लोकसभा सीट से जनार्दन मिश्रा पराजित होते हैं तो उनकी राजनीतिक छवि पर भी ढाबा लगेगा इसलिए पूरी ताकत से राजेंद्र शुक्ला के जनार्दन की नैया पार लगाने खेवनहार बने हुए हैं

मध्य प्रदेश के रीवा लोकसभा सीट का पिछला इतिहास ही कुछ अलग रहा है. चुनाव परिणाम आने के बाद यहां अक्सर ओली से जूजू निकलते आये है. पूर्व के चुनाव में तीन बार बहुजन समाज पार्टी के सांसद निर्वाचित हो चुके हैं और कई चुनाव में निकटतम प्रतिद्वंदी रहे. रीवा की जनता ने 1977 एवं 1989 में यमुना प्रसाद शास्त्री को भी जनता पार्टी की टिकट से सांसद बना दिया था. यहां वर्ष 1991 मे भीम सिंह पटेल ने बहुजन की टिकट से सांसद निर्वाचित हुऐ थे. लोकसभा चुनाव में रीवा संसदीय सीट से बहुजन समाज पार्टी ने खाता खोला था. इस बार बहुजन समाज पार्टी ने अभिषेक पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है. कांग्रेस और भाजपा की लड़ाई में इस बार अभिषेक पटेल मैदान मारने की तैयारी में जुटे हुए हैं.

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Rewa Lok Sabha constituency रीवा से चुने गये सांसदो नाम

  • 1952 में पहले सांसद के रूप में कांग्रेस से राजभान सिंह तिवारी चुने गए थे.
  • 1957 और 1962 में शिवदत्त उपाध्याय.
  • 1967 में शंभूनाथ शुक्ला भी कांग्रेस से जीते थे.
  • 1971 में महाराजा मार्तंड सिंह निर्दलीय चुने गए.
  • 1977 में यमुना प्रसाद शास्त्री जनता पार्टी से निर्वाचित हुए.
  • 1980 में मार्तंड सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते.
  • 1984 में मार्तंड सिंह कांग्रेस की टिकट से सांसद चुने गए.
  • 1989 में यमुना प्रसाद शास्त्री जनता दल की टिकट से निर्वाचित हुए.
  • 1991 में भीम सिंह पटेल ने बहुजन समाज पार्टी का खाता खोलकर सांसद चुने गए.
  • 1996 में बुद्धसेन पटेल बहुजन समाज पार्टी की टिकट से सांसद बने.
  • 1998 में चंद्रमणि त्रिपाठी ने भाजपा का खाता खोलकर यहां से निर्वाचित हुए.
  • 1999 में सुंदरलाल तिवारी कांग्रेस की टिकट से सांसद चुने गये.
  • 2004 में चंद्रमणि त्रिपाठी भाजपा की टिकट से निर्वाचित हुए.
  • 2009 में देवराज सिंह पटेल बहुजन समाज पार्टी की टिकट से सांसद बने.
  • 2014 में जनार्दन मिश्रा भाजपा एवं वर्ष 2019 में जनार्दन मिश्रा भाजपा की ओर से सांसद चुने गए.

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