Madhya Pradesh

रीवा में CID की कार्यवाही: बैंक में गिरवी रखकर उठाया लोन और फिर दूसरे को बेंच दी जमीन

सीआईडी भोपाल की कार्यवाही रीवा जिले के सहकारिता घोटाले के सरगना पर नया मामला दर्ज, नायक तहसीलदार सहित अन्य नामजद - Rewa News

Rewa News: रीवा जिले का बहुचर्चित सहकारिता घोटाला तो आप जानते ही होंगे लेकिन सहकारिता घोटाला से जुड़े आरोपी ने एक और घोटाला कर डाला. आरोपी के द्वारा एक ही जमीन को बार-बार बेचकर एवं बैंक में उसे गिरवी रखकर पैसा लिया गया. इस मामले की जब जांच करने सीआईडी भोपाल की टीम रीवा पहुंची तो वह भी हैरान रह गई. काफी जांच पड़ताल के बाद इस मामले का पूरा कच्चा चिट्ठा सामने आ गया. सीआईडी ने सहकारिता घोटाले के मास्टरमाइंड और उसके साले, सरहज, नायब तहसीलदार, सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

रीवा जिले के बहुचर्चित सहकारिता घोटाले के सरगना का अब एक नया घोटाला सामने आया है. सहकारिता घोटाले के मास्टरमाइंड मुख्य सरगना रामकृष्ण मिश्रा सहित आधा दर्जन लोगों के खिलाफ सीआईडी भोपाल (CID Bhopal) ने एक नए मामले में नाम जद किया है. जिसमें नायब तहसीलदार का भी नाम सामने आया है. जिन्होंने जमीन को बैंक में गिरवी रखकर लोन उठाएं और फर्जी तरीके से दूसरों को बेच दिया. पूरा मामला सामने आने के बाद अब रामकृष्ण मिश्रा सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

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रीवा जिले में वर्ष 2016 में हड़कंप मचाने वाला सहकारिता घोटाला प्रकाश में आया था, इसमें सहकारी बैंक डभौरा के कर्मचारी रामकृष्ण मिश्रा निवासी दोदर थाना पनबार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, मामले की जांच कर रही सीआईडी ने बैंक से नया घोटाला पकड़ा है. जिसमें फर्जी तरीके से जमीनों को गिरबी रखकर लोन लिया गया और बाद में उस खाते का इस्तेमाल सहकारिता घोटाले की राशि को खुर्द-बुर्द करने के लिए किया गया.

पूरे मामले की सीआईडी रीवा ने बारीकी से जांच की और आरोपी के खिलाफ सारे साक्ष्य एकत्र किया, जांच कर प्रतिवेदन भोपाल भेजा गया, भोपाल सीआईडी से आरोपियो के खिलाफ धारा 420, 467, 409, 468, 471, 474, 34,120 का अपराध दर्ज किया है.

इन्हें बनाया गया आरोपी

इस पूरे मामले में मुख्य मास्टरमाइंड रामकृष्ण मिश्रा, उनके साले अशोक कुमार मिश्रा,सास प्रभा देवी मिश्रा, सरहज ममता मिश्रा, निवासी कोनी थाना अतरैला वा नायब तहसीलदार अतरैला वित्त शामिल हैं. संदेहियों में तीन अधिवक्ता भी हैं जिन्होंने टाइटल सर्च रिपोर्ट जारी की थी और उसके बाद लोन जारी हुआ था.

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इस तरह से हुआ दूसरा घोटाला

सहकारी बैंक घोटाले के मुख्य मास्टर माइंड रामकृष्ण मिश्रा ने घोटाले की राशि से अपनी ससुराल कोनी में 12 किता जमीन वर्ष 2012 में खरीदी थी, जिसकी तीन रजिस्ट्री हुई थी, हालांकि जमीनो मे ससुराल वालों का नाम ही चढ़ा हुआ था. उस जमीन को यूबीआई बैंक अतरैला (UBI Bank Ataraila Rewa) में गिरवी रखकर आरोपी ने वर्ष 2014 में 16 लाख रुपए का लोन लिया था.

उस समय सहकारिता घोटाला सामने नहीं आया था, वर्ष 2016 में जब सहकारिता घोटाला सामने आया तो CID ने उसके खातों की जांच किया तो यह खाता भी सामने आया. जिसमें जमीन को गहन रखकर लोन लेने की जानकारी बैंक ने दी. उक्त जमीनों का पता लगाया गया तो वह उसके नाम पर नहीं पाई गई. आरोपी ने राजस्व अभिलेखों से अपना नाम गायब कर जमीन ससुराल वालों के नाम चढ़ावा दिया.

पंजाब नेशनल बैंक सिरमौर में भी जमीन को रखा गिरवी

ससुराल वालों ने उक्त जमीन वर्ष 2017 में पंजाब नेशनल बैंक सिरमौर (Punjab National Bank Sirmaur Rewa) में बंधक रखकर 14 लख रुपए का लोन उठा लिया, इतना ही नहीं इसी जमीन को आरोपियों ने वर्ष 2018 में सरिता प्रजापति के हाथो बेच दिया, लेकिन उसके नाम पर जमीन का नामांतरण नहीं करवाया और नामांतरण के लिए महिला से टालमटोल करते रहे. वर्ष 2020 में आरोपियों ने फिर इस जमीन को विजय प्रकाश मिश्रा व उनकी पत्नी आनंदिता मिश्रा को बेच दिया. आरोपी एक तरफ जमीन लोगों को बेचते रहे और दूसरी ओर बैंक में बंधक रखकर लोन भी उठाते रहे थे. जिनके खिलाफ सीआईडी भोपाल की टीम ने जांच के बाद मामला दर्ज कर लिया है.

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