MP Railways Bonus: दिवाली से पहले रेल कर्मचारियों को तोहफा; 78 दिनों के बोनस को मंजूरी, मिलेंगे 17,951 रूपये तक

MP Railways Bonus: दीवाली से पहले मध्य प्रदेश में रेलवे कर्मचारियों के बोनस को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों के प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस (PLB) को मंजूरी दे दी है। इससे मध्य प्रदेश के विभिन्न रेलवे डिवीजनों में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों को फायदा होगा। पात्र कर्मचारियों को अधिकतम 17951 रुपये तक का बोनस मिल सकता है।
मध्य प्रदेश में रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा बोनस
पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजनों के साथ रतलाम रेलवे डिवीजन में काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को यह 78 दिनों का बोनस मिलेगा। इसमें ग्रुप C के कर्मचारी और अन्य नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मी शामिल हैं।
इस बोनस के लिए पात्र कर्मचारियों की श्रेणियों में शामिल हैं:
- ट्रैक मेंटेनर्स
- लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर (गार्ड)
- स्टेशन मास्टर
- सुपरवाइजर और तकनीशियन
- टेक्नीशियन हेल्पर और पॉइंट्समैन
- मिनिस्ट्रियल (क्लर्क/ऑफिस) स्टाफ
इस फैसले से त्योहारों के मौसम में रेलवे कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिलेगी।
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अधिकतम 17,951 रुपये तक का बोनस
बोनस की गणना के लिए मासिक वेतन की सीमा 7,000 रुपये तय की गई है। इसके अनुसार, 78 दिनों के लिए अधिकतम बोनस राशि 17951 रुपये तय की गई है।
देश भर के 11.40 लाख रेलवे कर्मचारियों को होगा फायदा
इस बोनस योजना से देश भर के कुल 11,40,770 रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए 2,009.61 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है। यह बोनस रेलवे के प्रदर्शन से जुड़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे ने 1,670 मिलियन टन माल और लगभग 7.41 अरब यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया है।
बोनस की वेतन सीमा बढ़ाकर 18000 रुपए करने की मांग
78 दिनों के बोनस की घोषणा के बाद भी, कर्मचारी यूनियनों की एक पुरानी मांग अभी भी पूरी नहीं हुई है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लॉयीज यूनियन (WCREU) और इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार बोनस की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली 7000 रुपए की वेतन सीमा में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं किया गया है।कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि इस सीमा को बढ़ाकर 18000 रुपए कर दिया जाए। उनका तर्क है कि ऐसा करने से यह सातवें वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित न्यूनतम मूल वेतन के अनुरूप हो जाएगी।
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