MP Wildlife News: 100 साल बाद MP में जंगली भैंसों की वापसी, 8 भैंसें बड़े बाड़े में पहुंचीं

MP News: मध्य प्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों की वापसी की उम्मीदें बढ़ गई हैं। यह प्रजाति इस इलाके से लगभग एक सदी पहले खत्म हो गई थी। काजीरंगा से लाई गई आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिज़र्व के सुपखार ज़ोन में एक छोटे बाड़े से निकालकर 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में छोड़ा गया है।
प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले किया जाएगा अनुकूल
अगले चरण में उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले स्थानीय मौसम और माहौल के अनुकूल बनाने में मदद की जाएगी। वन विभाग ने अगले तीन वर्षों के भीतर इस इलाके में 50 जंगली भैंसों का झुंड तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार स्थित चकरवाह बाड़े में क्वारंटीन अवधि पूरी कर चुके असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों को प्राकृतिक आवास में विमुक्त किया।
मध्यप्रदेश में करीब 100 वर्षों बाद जंगली भैंसों की प्रजाति को पुनः स्थापित करने की दिशा… pic.twitter.com/uEHFzxe5e2
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) October 11, 2026
CM मोहन यादव ने किया स्थानांतरण प्रक्रिया का उद्घाटन
रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन आठ भैंसों को जिनमें छह मादा और दो नर शामिल हैं उनको बड़े बाड़े में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया का उद्घाटन किया। उन्हें असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से दो चरणों में मध्य प्रदेश लाया गया था। शुरुआत में, उन्हें नए माहौल में ढलने में मदद करने के लिए एक हेक्टेयर के बाड़े में क्वारंटीन में रखा गया था।
दो चरणों में काजीरंगा से कान्हा पहुंचीं भैंसें
पहले चरण में, 28 अप्रैल को तीन मादा और एक नर को लाया गया था। इसके बाद, 9 मई को तीन और मादा और एक नर आए। क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद, उन्हें 11 अक्टूबर को 17 हेक्टेयर के बाड़े में स्थानांतरित कर दिया गया।
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असम सरकार के सहयोग से आगे बढ़ी परियोजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि इन जानवरों को लगभग 2,200 किलोमीटर दूर स्थित काजीरंगा से मध्य प्रदेश लाया गया था। यह पहल असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से संभव हो पाई। मानसून का मौसम खत्म होने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने की योजना के अनुसार आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सुपखार में जंगली भैंसों की मौजूदगी के ऐतिहासिक प्रमाण
वन विभाग के अनुसार, सुपखार इलाके में जंगली भैंसों के रहने के ऐतिहासिक प्रमाण हैं। इसी आधार पर, उन्हें दोबारा बसाने का एक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ़ उनकी संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि राज्य के वन क्षेत्रों में इस प्रजाति को फिर से स्थापित करना और जैव विविधता को मजबूत करना है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ अन्य योजनाओं का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर एक अभयारण्य स्थापित करने और चीतों के लिए तीसरा आवास तैयार करने की पहल का भी ज़िक्र किया।
मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। राज्य में लगभग 100 वर्षों बाद जंगली भैंसों की पुनर्वास प्रक्रिया का अगला चरण प्रारंभ हो रहा है। असम से जंगली भैंसों को लाकर मध्यप्रदेश के प्राकृतिक आवास में पुनः बसाने का निर्णय लिया गया था। इसी सूपखार क्षेत्र में 28 अप्रैल 2026 और 9 मई… pic.twitter.com/r3xQOqJDOY
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