Indore Gold Smuggling Case: 100 करोड़ के सोना तस्करी मामले में पिता-पुत्र को झटका, कोर्ट ने खारिज की जमानत

Indore Gold Smuggling Case: इंदौर में सोने की तस्करी के एक बड़े मामले में DRI की जांच के बाद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एजेंसी के अनुसार दीपक खंडेलवाल नाम के आभूषण कारोबारी और उनके बेटे नकुल खंडेलवाल ने पिछले 2 से 3 वर्षों में लगभग 90 किलो सोना हासिल किया है जिसकी बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक है।
अधिकारियों का मानना है कि यह सारा सोना विदेश से तस्करी करके देश में लाया गया था और फिर आभूषण व्यवसाय की आड़ में खुले बाजार में बेच दिया गया। आज जिला अदालत ने दीपक खंडेलवाल और उनके बेटे नकुल खंडेलवाल दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। वहीं पिता-पुत्र दोनों ने तस्करी का सोना खरीदने के आरोपों से इनकार किया है।
वाहन मे छिपाकर रखी गई थी सोने की तीन ईंटें
जांच एजेंसी को पुख्ता जानकारी मिली थी कि रोमेल और यश लालवानी पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से शहर की ओर आ रहे हैं और उनके पास सोना है। इस सूचना के आधार पर 14 अगस्त को अधिकारियों ने एक संदिग्ध वाहन को रोका और उसकी तलाशी ली जिसमें सवार रोमेल और यश लालवानी को हिरासत में ले लिया गया। तलाशी के दौरान अगली सीट के नीचे बने एक गुप्त खाने से सोने की तीन बड़ी ईंटें मिलीं जिनकी अनुमानित कीमत 4 करोड़ रुपये है। पूछताछ में पता चला कि यह सोना एक स्थानीय व्यापारी को बेचा जाना था।
बिचौलिए के जरिए सोने की खरीद का आरोप
जैसे जैसे जांच आगे बढ़ी मुख्य संदिग्धों और स्थानीय स्वर्ण बाजार की एक फर्म के बीच संबंध सामने आए। आरोपियों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया। एजेंसी की गहन जांच से पता चला कि पिछले कुछ वर्षों में बिचौलिए के जरिए भारी मात्रा में सोना खरीदी किया गया था।
अधिकारी अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि इन लेन-देन के दौरान सरकारी करों खासकर कस्टम ड्यूटी की चोरी कैसे की गई और वे इसमें सीधे तौर पर शामिल सभी लोगों की पहचान करने में जुटे हैं।
नकद भुगतान करने वाले खरीदार भी जांच के दायरे में
इतनी बड़ी मात्रा में सोना जमा किए जाने का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों ने उन प्रमुख खरीदारों पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है जिनपर भारी मात्रा में नकद देकर सोना खरीदने का आरोप है। इसके अलावा कुछ स्थानीय दुकानदारों की संदिग्ध गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। हालाँकि उनकी वास्तविक संलिप्तता किस हद तक है इसकी आधिकारिक पुष्टि जाँच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अदालत में क्या दलीले दी गई
अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने तस्करी की गतिविधियों में आरोपियों की किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया। उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी लंबे समय से इस व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और उन्हें तब पकड़ा गया जब वे अपने परिवार के साथ एक धार्मिक यात्रा पर जा रहे थे।
वहीं दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने जाँच एजेंसियों की ओर से मजबूत पक्ष रखा। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद जिला अदालत ने दो आरोपियों एक पिता और उसके बेटे द्वारा दायर की गई जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।
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